Shree Hari Vishnu Ji ki Aarti

श्री हरि विष्णु जी की आरती

shree-hari-vishnu-ji-ki-aarti


ॐ जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट, छन में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे

जो ध्यावै फल पावै, दु:ख बिनसै मनका।
सुख सम्पत्ति घर आवै, कष्ट मिटै तनका॥ ॐ जय जगदीश हरे

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
पार ब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मुरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमती॥ ॐ जय जगदीश हरे

दीनबन्धु, दु:खहर्ता तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पडा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे


आरती करते समय ध्यान में रखने योग्य बातें 

आरती करना सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि भगवान के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। आरती करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना ज़रूरी होता है ताकि पूजा पूर्ण फलदायक और शुद्ध भाव से सम्पन्न हो सके।

1. शुद्धता और स्वच्छता

आरती से पहले हाथ-पैर धोकर साफ वस्त्र पहनें।

पूजा स्थल साफ-सुथरा और शांत होना चाहिए।

मानसिक और शारीरिक शुद्धता बहुत आवश्यक है।

2. पूजा की सामग्री तैयार रखें

दीपक (घी या तेल का), कपूर, अगरबत्ती, धूपबत्ती, फूल, घंटी, और आरती की थाली तैयार रखें।

आरती थाली में एक दीपक, फूल, अक्षत (चावल), कुमकुम आदि रखें।

थाली को शुद्ध और सुंदर रखें।

3. भावना और श्रद्धा

आरती भावपूर्ण तरीके से करें। सिर्फ शब्द बोलने से नहीं, बल्कि मन से भगवान को महसूस करें।

मन एकाग्र रखें, आरती के समय कोई और बात न सोचें।

4. आरती की दिशा और क्रम

भगवान की मूर्ति या चित्र के सामने पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

आरती को दाएँ से बाएँ (घड़ी की दिशा में) गोल घुमाना चाहिए।

दीपक को भगवान के चरणों से सिर तक तीन बार घुमाएं (पांव, नाभि, मुख/मस्तक)।

5. घंटी बजाना

आरती करते समय धीरे-धीरे घंटी बजाएं, ताकि वातावरण भक्तिमय और पवित्र हो जाए।

यदि मंदिर या घर में अन्य लोग हों तो उनके साथ सामूहिक आरती करें।

6. आरती के बाद हाथ सेंकना

आरती पूरी होने के बाद हाथों को आरती की लौ के ऊपर से फेरकर आंखों पर लगाना चाहिए — यह सम्मान और आशीर्वाद ग्रहण करने का प्रतीक है।

7. प्रसाद और आरती का वितरण

आरती के बाद दीपक की लौ को सबको दिखाएं और प्रसाद बांटें।

आरती की थाली को नीचे ज़मीन पर न रखें; उसे साफ स्थान पर रखें।

8. शांति बनाए रखें

आरती के समय मोबाइल फोन, बातचीत या हँसी-मज़ाक न करें।

आरती पूरी होने तक स्थिर बैठें और ध्यान भगवान पर ही रखें।

9. नियमितता और समय

आरती नियमित रूप से सुबह और शाम को करें।

आरती का समय निश्चित रखने से मानसिक अनुशासन और ध्यान में वृद्धि होती है।

10. पर्यावरण और सुरक्षा

दीपक जलाते समय ध्यान रखें कि आग से कोई नुकसान न हो।

आरती थाली बच्चों से दूर रखें।


आरती करने के लाभ / फायदे 

आरती करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि यह आध्यात्मिक, मानसिक और ऊर्जा स्तर पर बहुत सारे फायदे देता है। जब श्रद्धा और भक्ति से आरती की जाती है, तो उसका असर व्यक्ति के जीवन, मन और आसपास के वातावरण पर गहरा पड़ता है।

1. मानसिक शांति और एकाग्रता

आरती करते समय मन पूरी तरह भगवान में लग जाता है।

यह मन को शांत, एकाग्र और तनावमुक्त करता है।

मानसिक उलझनों और बेचैनी से राहत मिलती है।

2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार

दीपक की लौ, घंटी की ध्वनि और मंत्रों का कंपन वातावरण को सकारात्मक बनाता है।

घर या स्थान की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

जहां रोज़ आरती होती है, वहां सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

3. ईश्वर से जुड़ाव और आत्मबल में वृद्धि

आरती आत्मा को ईश्वर से जोड़ती है, भक्ति भाव बढ़ता है।

इससे आत्मविश्वास, धैर्य और साहस में वृद्धि होती है।

इंसान के जीवन में अध्यात्मिक संतुलन आता है।

4. कर्मों की शुद्धि और आशीर्वाद की प्राप्ति

नियमित आरती करने से पिछले बुरे कर्मों का नाश होता है।

भगवान की कृपा और आशीर्वाद जीवन में बना रहता है।

जीवन के संकट और बाधाएँ धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।

5. परिवार और घर में सुख-शांति

जब परिवार के सदस्य मिलकर आरती करते हैं तो आपसी प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।

घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है।

गृह कलह, दरिद्रता और रोग जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

6. ध्वनि चिकित्सा (Sound Healing)

आरती में बजाई जाने वाली घंटी, शंख, और भक्ति गीतों की ध्वनि शरीर की कोशिकाओं पर सकारात्मक असर डालती है।

यह विज्ञान भी मानता है कि नियमित ध्वनि कंपन से मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।

7. नियमितता और अनुशासन

सुबह-शाम आरती करने की आदत जीवन में नियमितता और अनुशासन लाती है।

यह दिन की शुरुआत और अंत को शुभ बनाती है।

8. प्राकृतिक तत्वों से जुड़ाव

दीपक, फूल, जल, अग्नि, धूप आदि के प्रयोग से हम पंचतत्वों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं।

यह प्रकृति से जुड़ने और उसके संतुलन में रहने की आदत डालता है।

9. आध्यात्मिक उन्नति

आरती एक प्रकार का ध्यान (meditation) भी है।

इससे आत्मा की शुद्धि होती है और मोक्ष की दिशा में अग्रसरता होती है।

10. बच्चों में संस्कार और आध्यात्मिकता

जब बच्चे आरती में भाग लेते हैं, तो उनमें अच्छे संस्कार, ईश्वर के प्रति श्रद्धा और अनुशासन का विकास होता है।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!